Saturday, October 8, 2011

दिल के ज़ज्बात यूँ दिखे हर सू 
लोग हंस कर गले मिले हर सू 


आज भी है सवाल, सहरा में
आब ही आब क्यूँ दिखे हर सू


ज़िंदगी मुस्करा नहीं पाती  
चश्मे नम लोग दिख रहे हर सू 


कोई हैवान क्यूँ बना होगा
नेक इन्सां हैं पूछते हर सू



ख्वाहिशें बढ़ गयी हैं अब इतनी
आज ईमान बिक रहे हर सू



दिल कई आज रात टूटे हैं 
लोग अफ़सूरदा दिखे हर सू 



गुम कहाँ हो गयी मुहब्बत सब  
आज दिखते हैं दिलजले हर सू 



दुःख भरे दिन को अल विदा कह कर 
दीप खुशियों के जल उठे हर सू 

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