Sunday, March 4, 2012

फलक से सितारे जमीं पर मैं ला दूं

फलक से सितारे जमीं पर मैं ला दूं
मैं सूरज को इक फूंक में ही बुझा दूं

अगर तू  कहे चाँद तारों को लाकर
उन्हें मैं तेरे घर की जीनत बना दूं 

तू मुझसे करेगा अगर बेवफाई
तो मुमकिन है सारी खुदाई मिटा दूं 

तेरी बद्दुआओं का ऐसा असर हो 
मैं तुझ पर ही सारी दुआएं लुटा दूं

कभी चाँद तेरे मुक़ाबिल जो आये
मैं उसकी हकीकत जहाँ को बता दूं

बहारों के दिन रो के काटे हैं मैंने
जज़ा दूं किसे और किसको सजा दूं

शरारें हैं पोशीदा मेरी हँसी में
कहो तो हँसूं और दुनियाँ जला दूं

Tuesday, February 28, 2012

जो खुद को भूल चुका है वो यार किसका है

जो खुद को भूल चुका है वो यार किसका है
न जाने फिर भी तुम्हे इंतज़ार किसका है

हरेक सिम्त जो अफ्सूरदा दिखे मुझको
मकीं बिना ये मकां शानदार किसका है

नही बरसते कभी अब्र गरजने वाले
लगा जो तंज उसे नागवार, किसका है

चुका दिया है वतन का जो क़र्ज़ था उस पर
जवां वो वीर कहो कर्ज़दार किसका है

कहो जमीन सा या कह लो आसमां जैसा 
बहुत अजीब है, ये शाहकार किसका है

निभा सको तो निभा लो यकीन को अपने
अगर तुम्हारा नही है तो प्यार किसका है

कोई तो बात हुई है जरूर महफ़िल में
बहुत उदास खडा जो, शिकार किसका है

तू रखना याद हमेशा उसी की ममता को
मिला तुम्हे है जो अब तक दुलार किसका है

लिया था सुर्ख  कभी इक गुलाब हाथों में
चुभा ये दिल में तभी से जो खार किसका है




हमसे न हुई ऐसी कोई बात दरमियां

हमसे न हुई ऐसी कोई बात दरमियां  
है कौन जो करता है खुराफात दरमियां

हो तुम भी वही मैं भी वही, वज्ह क्या हुई 
होने जो लगीं तर्के मुलाक़ात दरमियां  

दुनिया में भले भी हैं बुरे भी हैं इर्द गिर्द
करते हैं बुरे लोग फसादात दरमियां

मैंने तो कभी भी न कहा भूल जा मुझे
फिर कैसे हुईं ऐसी वजूहात दरमियां

होती तो है बरक़त जो मुहब्बत रहे मकीं
करते ही रहे दोनों नियाज़ात दरमियां

आऊँ न बुलाने पे तुम्हारे हुज़ूर में
ऐसे न कभी होंगे ये हालात दर्मियां

आँसू है तेरे मेरे लिए जामे खुदकुशी
आँसू है मेरे रूहे अलामात दरमियां


जब भी मेरा गमज़दा होना जरूरी हो गया

जब भी मेरा गमज़दा होना जरूरी हो गया
यक ब यक घर का हर इक कोना जरूरी हो गया

मैं भिगोता जा रहा हूँ आस्तीं बस इस लिए
जो न होना था वही होना जरूरी हो गया

जाने कितने रंग दिखलाएगी मेरी ज़िंदगी
आज हँसने के लिए रोना जरूरी हो गया

जो कभी चाहा हुआ हासिल मुझे बस ख़्वाब में
ख़्वाब में जो भी मिला, खोना जरूरी हो गया

क़द्र रिश्तों की पता है, हम निभाते भी रहे
पर नये हालात में ढोना जरूरी हो गया

मैं अगर भटका तो मेरी जान जायेगी जरूर
जान से पर हाथ अब धोना जरूरी हो गया

ज़िंदगी की जंग में होती रहीं नीदें हराम
ऐसा लगता है कि अब सोना जरूरी हो गया



मुमकिन है तुझको उसकी हकीकत पता न हो

मुमकिन है तुझको उसकी हकीकत पता न हो
मुफलिस जो दिख रहा है कहीं वो खुदा न हो  

अक्सीर दिल के दर्द की है इक दवा मुफ़ीद
झुक कर उठा उसे जो कभी खुद उठा न हो 

मुझसे गले मिला तो नयी बात क्या हुई
उसको गले लगा जो तेरा हमनवा न हो 

दुश्वारियों से हो के परेशान तू न रुक
जलने में क्या मज़ा जो मुखालिफ हवा न हो ?

होने लगा है ऐसा भी 'इन्साफ' आजकल 
जिसने किया है जुर्म उसी को सजा न हो

उनकी उदासियों का पता ऐसे चल गया
यूँ हंस रहे थे जैसे कहीं कुछ हुआ न हो

खुद को नवाज़ना तो बड़ी आम बात है
उस को नवाज़ जिसका कोई भी खुदा न हो